maa baglamukhi
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माँ बगलामुखी

माँ बगलामुखी मंदिरम - श्री योगिनी पीठम में माँ बगलामुखी साक्षात् विराजमान है | माँ के श्री विग्रह को ३३ करोड़ मन्त्र से भी अधिक जप अनेक सुयोग्य साधको के द्वारा वर्षो पर्यन्त्र अनुष्ठान करके प्राण -प्रतिष्ठित किया गया है चैत्र -नवरात्रि सवंत 2075 (मार्च - 2018) में दिल्ली स्थित प्रसिद्ध लाल किला मैदान में सम्पादित राष्ट्र रक्षा महायज्ञ में हुए 11 करोड़ माँ बगलामुखी मंत्र का जप भी इन्ही माँ बगलामुखी को समर्पित है इनके दर्शन मात्र से ही इनकी प्रत्यक्ष अनुभूति होने लगती है साधक तत्काल माँ से जुड़ जाता है श्री विग्रह के चारो ओर एक शक्ति पुज्ज का आभा मंडल है जो अपनी ओर आकर्षित करता है जीवन की अनेक कठिनाइयाँ जैसे - शारीरिक -मानसिक कष्ट आर्थिक सामाजिक एवं राजकीय परेशानियाँ अतिशीघ्र दूर हो जाती है माँ की कृपा से कष्ट मुक्ति , रोग निवृति शत्रु नाश और न्यायालय में विजय राज दण्ड के भय का निवारण होता है | माँ के मंत्रो की साधना के प्रभाव से जगदा कर्षण होता है निर्वाचन में विजय की प्राप्ति आदि अनेक मनो वांछित फल प्राप्त होते है | इनकी महिमा वर्णातीत है।

मानव प्राणी अपने चारो ओर विस्तृत जगत् के स्थूल-सूक्ष्म दृश्यादृश्य सभी पदार्थों के बारे में अर्थात् प्रकृति के समस्त गूढ़ रहस्यों को जानने की जिज्ञासा और प्राप्ति करने की लालसा के अतिरिक्त इसके निर्माता और नियामक शक्ति के बारे में भी जानने और साक्षात्कार करने की निरन्तर इच्छा रखता है। इसी उद्देश्य से अनेक प्रकार के धर्म, मत-सम्प्रदायादि के अनुसार लोग अपनी रुचियों के अनुरूप आध्यात्मिक अनुसंधान में लगे रहते हैं। बहुधा लोग पूरा जीवन धार्मिक क्रिया कलापों में व्यतीत कर देते हैं जिसमें कुछ ही सफलता प्राप्त कर पाते हैं बाकी लोगों को निराशा के अलावा कुछ हाथ नहीं लगता।

असफलता के कारण कुछ भी हो सकते हैं किन्तु यह निश्चित है कि उचित दिशा और सही मार्ग-दर्शन के बिना कोई भी कार्य सिद्ध नहीं हो सकता।साधना-उपासना की कई परत्तियाँ हैं जिसमें सभी प्रकार की साधनाओं का मूल ‘‘तंत्र-ऋशास्त्र’’ है। तन्त्र-मार्ग स्थूल-साधना से लेकर साधना के अत्यन्त गूढ़ रहस्यों जैसे -यन्त्र-मन्त्र एवं योग आदि की परम सिद्धि का एक मात्र अवलम्ब है।

शाक्त-तंत्र में काली-तारा आदि दश महा विद्याओं की साधनाएं सर्व विदित हैं। जिनमें माताश्री बगलामुखी सद्यः और प्रत्यक्ष फल देने वाली हैं। ये स्तम्भिनी शक्ति हैं। परमा शक्ति भगवती बगलामुखी समस्त लोकों की आधार हैं।
पृथ्वी के अतिरिक्त अन्तरिक्ष ;व्योमद्ध में दृष्टिगोचर नक्षत्र, तारा-मण्डल, सूर्य-चन्द्रादि सभी ग्रह, माईं बगलामुखी के परम शक्ति के द्वारा ही स्तम्भित होकर अपनी स्थिति में स्थिर हैं।

बगलामुखी की साधना से साधक के मन और प्राणवायु का स्तम्भन होता है। चक्र जागृत होते हैं। साधक समाधि की स्थिति को प्राप्त कर आनन्दित होता है। कलियुग में माई अति शीघ्र और प्रत्यक्ष फल देती हैं। पीताम्बरा श्री बगलामुखी की पूजा-साधना के सम्बन्ध में कुछ मिथक और भ्रम अज्ञानियों ने जन-मानस में फैलाया हुआ है जैसे -
1 यह शत्रु-बाधा, मुकद्दमें में जीतने के लिए ही की जाती है।
2 बगलामुखी की साधना अत्यन्त जटिल और कठिन है, इसको कोई विशेष व्यक्ति ही कर सकता है।
3 इस साधना का विपरीत प्रभाव हो सकता है, जिससे साधक को हानि उठानी पड़ सकती है।

इन तथ्यों में जरा भी सच्चाई नहीं है। किन्तु यह अवश्य है कि बिना साधना विधि जाने मनमाने ढंग से की गई साधना अभीष्ट फल प्रदायक नहीं होती। मां बगलामुखी श्री ललिता त्रिपुर सुन्दरी की अंग व अभिन्न विद्या अर्थात् श्री विद्या ही हैं।
‘‘मंगला शोभना शुभ निष्कला परमाकला।
विश्वेश्वरी विश्वमाता ललिता हसितानना।।’’

ये विष्णोपासिता हैं, विष्णु की प्रार्थना पर उन के कल्याण के लिए प्रकट हुई इसलिए वैष्णवी शक्ति हैं।
‘‘रक्षोहणं वलगहनं वैष्णवीमिदमहं तं बलगमुत्किरामि’’

यजुर्वेद के इस मन्त्र में इन्हीं वैष्णवी शक्ति से रक्षा हेतु प्रार्थना की गई है। ब्रह्मा, विष्णु, रुद्र तथा इन्द्रादि देवता ऋषियोँ के द्वारा उपासिता ब्रह्मास्त्र-विद्या हैं इनका उपासक सभी मनोरथों को प्राप्त करता है। धनाध्यक्षा, धनेशी...धनदा, धना। राज-राजेश्वरी..... आदि इनके नाम स्वतः सिद्ध करते हैं कि माई का साधक सर्व विध सुख-समृद्धि प्राप्त करता है।

माँ पीताम्बरा बगलामुखी का आशीर्वाद यशस्वी बने - सुखी रहे ।

पूज्यपाद सर्वतन्त्रसर्वग्य निगमागमतंत्रपरिणः
परिव्राजकाचार्य जगतगुरु श्री योगिनी पीठाधीश्वर
अनन्त श्री विभूषित ब्रह्मर्षि योगिराज शिवस्वरूप
परमहंस स्वामी श्री शिव कुमार जी महाराज